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हरदोई,मातृ भाषा, जनभाषा को शिक्षा परीक्षा का माध्यम बनाएं: श्याम पाठक.

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हरदोई,मातृ भाषा, जनभाषा को शिक्षा परीक्षा का माध्यम बनाएं: श्याम पाठक


हरदोई। श्री सरस्वती सदन के चार दिवसीय हिन्दी दिवस के  समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हुई नोएडा से पधारे भाषा सत्याग्रही  श्याम पाठक अंग्रेजी भाषा को शोषण का सबसे बड़ा आधार मानते हुये कहा कि जब तक हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं को सम्मान नहीं मिलेगा और अपनी मातृभाषा और जनभाषा को शिक्षा परीक्षा को माध्यम नहीं बनाया जायेगा तब तक देश की प्रतिमाओं को पूर्ण क्षमता के साथ विकसित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अंग्रेज शासक दासता के सौ वर्षों मे देश पर अंग्रेजी थोप गये। परन्तु आजादी के अमृत पर्व के वर्षों में भी हम हिन्दी और भारतीय भाषाओं को समुचित सम्मान नहीं दिला सकें। अपने महत्वपूर्ण व्याख्यान के अतिरिक्त उन्होंने सदन द्वारा पिछले चार दिनों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किये।


अपने संबोधन में श्री पाठक ने कहा कि भारत जैसे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिये यह अफसोस की बात है कि अपनी भाषा के बजाये शीर्ष संस्थानों में दासता की भाषा अननायी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में अंग्रेजी भाषा में पले और बढ़े लोग एक प्रतिशत से भी कम है जो कि अंग्रेजी के पक्षधर है और हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के विकास में बाधक है इसलिये हम सबको इस बात के लिये संकल्प लेना होगा कि शासक वर्ग यह समझे कि जनभाषा की उपेक्षा जनता अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दी और भारतीय भाषाओं को समुचित सम्मान न मिला तो देश की प्रतिभाएं पंगु बनी रहेगीं व्याख्यान के बाद प्रश्न प्रहर में सी०एस०एन० के पूर्व प्राचार्य डा० बी० डी० शुक्ल, डॉ० एन० सी० शुक्ल एवं डॉ० आलोक टंडन ने प्रश्न किया हिन्दी के विकास में शासन प्रशासन अथवा जनता किसे दोषी माना जाये। इस पर भी पाठक ने कहा कि जब शासन शिक्षा से लेकर नौकरियों तक में अंग्रेजी को प्राथमिकता देगी और लागू रखेगी तो जनता विवश होकर अंग्रेजी की ओर जायेगी। उन्होंने अंग्रेजी के प्रभुत्व को बनाये रखने के लिये शासक वर्ग एवं शासन प्रशासन को दोषी ठहराया और कहा कि जब विकास के अवसर हिन्दी माध्यम से उपलब्ध होगे तो हिन्दी स्वयं आगे बढ़ेगी। उन्होंने विश्व के अनेक देशों की तुलनात्मक समीक्षा करते हुये कहा कि जो देश अपनी मातृभाषा में काम कर रहे है। उनकी प्रति व्यक्ति आय हमसे कहीं अधिक है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों में केप्रभुत्व को लेकर चिंता जाहिर की और इस बात पर बल दिया कि अपनी मातृभाषा में अदालती कार्यवाही होनी चाहिए। तभी जनता को न्याय मिल सकेगा।


कार्यक्रम का प्रारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और शरण मिश्र की बाणी बन्दना से हुआ इसके पश्चात अपने स्वागत भाषण में सदन मे बाजपेयी ने भाषा सत्याग्रही श्याम रुद्र पाठक के हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिये किये गये संघर्षों से श्रोताओं को परिचित कराते हुये बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने कैरियर को दाव पर लगा कर आई०आई०टी० [दिल्ली को अपना प्रोजेक्ट को हिन्दी में प्रस्तुत करने और दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री से मिलने वाली मानद उपाधि को हिन्दी में छापने के लिये मजबूर कर दिया उन्होंने हिन्दी के लिये उनके संघर्ष को प्रणाम करते हुये कहा कि सदन परिवार उन्हें सम्मानित कर गौरवान्वित है सदन मंत्री मनीष मिश्र और अनिल श्रीवास्तव ने शाल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह देकर मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। समापन समारोह की अध्यक्षता भारत सरकार के पूर्व हिन्दी सलाहकार एस० एन० अग्निहोत्री ने की और कार्यवाही का संचालन महेश मिश्र ने किया पुस्तकालयाध्यक्ष सीमा मिश्र तथा सरिता अग्रवाल ने विजेता बच्चों को वितरित किये जाने वाले पुरस्कारों में अपना सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर विश्व में शांति का संदेश देने वाले प्रेम रावत जी की पुस्तक तीर का लक्ष्य पूर्ण कुमार गुप्ता तथा मनोज गुप्ता ने मुख्य अतिथि तथा तथा सदन अध्यक्ष को भेंट की।

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