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हरदोई,बिजली दरों को कम करने की मांग, उपभोक्ता परिषद ने दाखिल की याचिका.

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हरदोई,बिजली दरों को कम करने की मांग, उपभोक्ता परिषद ने दाखिल की याचिका


हरदोई।बिजली दर में जल्द कमी करने के लिए उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि कंपनियों पर उपभोक्ताओं के 25,133 करोड़ रुपये निकल रहे हैं, इसके एवज में जल्द कदम उठाकर उपभोक्ताओं को राहत देना चाहिए।


उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने नियामक आयोग चेयरमैन से की मुलाकात कहा कि आयोग अविलंब शुरू करें। कार्यवाही विद्युत अधिनियम 2003 के तहत उपभोक्ताओं को हक दिलाना आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि प्रदेश की पांचों बिजली कंपनियों मध्यांचल पूर्वांचल दक्षिणांचल पश्चिमांचल केस्को सहित एकमात्र निजी घराने की कंपनी नोएडा पावर कंपनियों पर उपभोक्ताओं के पैसा निकल रहा है। यदि इस हिसाब से देखा जाय तो बिजली की दर तीन से 10 प्रतिशत तक कम हो जाएगा, लेकिन बिजली कम्पनियां उलझाने का काम कर रही हैं। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2022-23 की जारी टैरिफ आदेश व ट्रू-अप आदेश 20 जुलाई 2022 पर विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों को ध्यान में रखकर उपभोक्ताओं के हितों पर ध्यान देना चाहिए।


उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष वह राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज इस संबंध में विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन आर पी सिंह से मुलाकात कर उन्हें पुनर्विचार याचिका सौंपी। उपभोक्ता परिषद ने अपनी याचिका में यह गंभीर मुद्दा उठाया और कहा कि जिस प्रकार से नोएडा पावर कंपनी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 10 प्रतिशत की कमी की गई। उसी आधार पर उत्तर प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में भी अगले 6 वर्षों तक 7 प्रतिसत की कमी कराई जाए, क्योंकि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 25133 करोड रुपए निकल रहा है। ऐसे में एक साथ बिजली दरों में कमी होगी, तो वह लगभग 42 प्रतिशत के ऊपर होगी।


आज उपभोक्ता परिषद ने अपनी याचिका में एक ऐसा संवैधानिक दांव चला है जिससे बिजली कंपनियों के होश उड़ जाएंगे। अब बिजली दरों में कमी का रास्ता विद्युत नियामक आयोग को उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार याचिका के बाद निकालना ही बाध्यकारी होगा क्योंकि उपभोक्ता परिषद ने विगत दिनों जारी टैरिफ आदेश के इस वर्ष में निकले 3088 करोड़ के एवज में तत्काल दरों में कमी की बात बताकर उठा दी है और इस पर कोई भी मुकदमा किसी भी अपीलेट ट्रिब्यूनल में दाखिल नहीं है। इसको पावर कॉर्पोरशन अब कैसे रोकेगा।

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