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अटरिया,झोलाछाप डॉक्टर नर्सिंग एक्ट को दिखा रहे ठेंगा, लोगों की जान से कर रहे खिलवाड़ ग्रामीण क्षेत्र में झोलाछाप डाक्टरों की भरमार.

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अटरिया,झोलाछाप डॉक्टर नर्सिंग एक्ट को दिखा रहे ठेंगा, लोगों की जान से कर रहे खिलवाड़ ग्रामीण क्षेत्र में झोलाछाप डाक्टरों की भरमार

रिपोर्ट, योगेंद्र पाण्डे( पप्पू पाण्डे )

अटरिया सीतापुर,कस्बे में झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें दिनों दिन बढ़ती जा रहीं हैं। इन फर्जी डॉक्टरों द्वारा मरीजों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। कस्बा में जगह-जगह बिना रजिस्ट्रेशन वाले डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं। इतना ही नहीं क्लीनिकों के नाम बड़े शहरों के क्लीनिकों की तर्ज पर रखते है, जिससे लोग आसानी से प्रभावित हो जाते है।  मरीज अच्छा डॉक्टर समझकर इलाज करवाते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का पता नहीं रहता है कि उनका इलाज भगवान भरोसे किया जा रहा है। 

फर्जी डॉक्टरों के लिए यह धंधा काफी लाभदायक है। मरीजों को लुभाने के लिए बड़े डॉक्टरों की तर्ज पर जांच करवाते हैं और जांच के आधार पर मरीज का इलाज करते हैं, जिससे मरीज को लगे कि डॉक्टर सही हैं एवं उनका इलाज सही तरीके से किया जा रहा है। कसबा की लगभग हर गली में एक-दो फर्जी क्लीनिक चल रहे हैं। फर्जी डाक्टरों ने इस धंधे को और लाभदायक बनाने के लिए लखनऊ के कुछ निजी अस्पतालों से भी सांठगांठ कर रखी है। मरीज की हालत ज्यादा गंभीर होने पर लखनऊ भेज देते हैं, जहां से उन्हें कमीशन के तौर पर फायदा होता है। फर्जी डॉक्टरों का कस्बा में ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी धंधा फल-फूल रहा है। फर्जी डॉक्टर ग्राम स्तर पर शाखाएं जमाए हुए हैं और बड़े डॉक्टरों की तर्ज पर सप्ताह में चार दिन बिना संसाधनों के क्लीनिक चलाते हैं। फर्जी डॉक्टर वहीं दवा लिखते है जिनमें उन्हें कमीशन मिलता है। अक्सर ऐसे मामले देखने को मिलते है कि फर्जी डॉक्टरों के इलाज से मरीज की जान पर आफत आ जाती है और फर्जी डॉक्टर अपने बचाव के लिये लखनऊ प्राईवेट अस्पताल रेफर कर  देते है। स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन को इनकी भनक तक नहीं है कि क्षेत्र में फर्जी डॉक्टरों द्वारा कितने बिना पंजीकरण के क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। यदि शीघ्र ही फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो इनकी संख्या बड़ी तादाद में बढ़ जाएगी और मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होता रहेगा। स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन को उचित कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे आम जनमानस को फर्जी डॉक्टर के चुंगल में फंसे से बचाया जा सके। 

मौसम बदलते ही झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। बिना डिग्री, डिप्लोमा के इलाज कर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। लगातार शिकायतें मिलने के बाद भी विभागीय अफसर शांत बैठे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी दुकानदारी जमा ली है। कोरोना जैसी बीमारी के समय भी झोलाछाप डॉक्टर लोगों का इलाज करने से बाज नहीं आ रहे थे।

सर्दी, खांसी के मरीजों को मेडिकल पर दवा देने के लिए मना किया गया है, लेकिन यह झोलाछाप डॉक्टर ऐसे मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इलाज करते समय सावधानी भी नहीं बरती जा रही है और सर्दी, जुखाम के मरीज को देखने के बाद यह दूसरे मरीजों का इलाज करना शुरू कर देते हैं।


बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चिंता


स्वास्थ्य विभाग द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई न करने के कारण ही इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। कार्रवाई न होने का फायदा उठाते हुए दूसरे जगहों के फर्जी डॉक्टर भी यहां आकर इलाज करने लगे हैं। गर्मी का मौसम लगते ही सर्दी, खांसी व बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। बड़े डॉक्टर को दिखाने के बजाय लोग झोलाछाप डॉक्टरों के पास अपना इलाज करा रहे हैं। इलाज करने के एवज में झोलाछाप डॉक्टर्स शुल्क भी ले रहे हैं। लगातार झोलाछाप डॉक्टरों की तादाद बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभागीय अधिकारी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने का दावा कर रहे हैं। 10 से अधिक झोलाछाप डॉक्टरों की शिकायत हो चुकी हैं। लेकिन कार्रवाई नहीं के बराबर है। कई झोलाछाप डॉक्टर गांव में किराए का दुकान लेकर उसमें दो से तीन बेड भी लगा दिए हैं।

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