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औरैया,सुरक्षित मातृत्व के लिए अब हर माह की 24 तारीख को होगा सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक का आयोजन.

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औरैया,सुरक्षित मातृत्व के लिए अब हर माह की 24 तारीख को होगा सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक का आयोजन

- 50 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय सहित अजीतमल और बिधूना में मिलेगी सुविधा

- नौ तारीख को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर होता है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस का आयोजन


औरैया 14अप्रैल, 2022। 


मातृ और शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को और विस्तार देने का निर्णय लिया है। हर माह की नौ तारीख को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित किए जाने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस के साथ-साथ हर माह की 24 तारीख को एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) स्तर पर सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक का आयोजन किया जाएगा। 


मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया - सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में भी गर्भवती प्रसवपूर्व गुणवत्तापरक निशुल्क जांच और उपचार का लाभ उठा सकेंगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय की ओर से इस संबंध में आदेश प्राप्त हुए हैं। इस संबंध में सभी एफआरयू स्तरीय फैसिलिटीज के प्रभारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। नौ तारीख को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित होने वाला प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस यथावत चलता रहेगा।


अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. शिशिर पुरी  ने बताया - राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को विस्तार दिया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक गर्भवती इसका लाभ उठा सकें। अभियान के अंतर्गत मई, 2016 से हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन कर स्वास्थ्य केंद्रों पर समस्त गर्भवती महिलाओं को द्वितीय और तृतीय तिमाही में निशुल्क प्रसव पूर्व गुणवत्तापरक जांचों और उपचार की सुविधा दी जाती है। 


अब हर माह की 24 तारीख को भी जनपद में संचालित तीनों एफआरयू 


जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता अखिलेश कुमार ने बताया की 50 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों अजीतमल और बिधूना पर कम से कम एक बार विशेषज्ञ अथवा एमबीबीएस चिकित्सक की देखरेख में यह सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जाएंगी। निशुल्क जांचों में गर्भवती को ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर, यूरीन टेस्ट, हीमोग्लोबिन और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) चिन्हित की जाती है ताकि जरूरत के हिसाब से आगे का उपचार उपलब्ध कराया जा सके। 

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