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सीतापुर,पहले घंटे के अंदर गाढ़ा पीला दूध पिलाएं, नवजात को बीमारियों से बचाएं .

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सीतापुर,पहले घंटे के अंदर गाढ़ा पीला दूध पिलाएं, नवजात को बीमारियों से बचाएं 

– 21 नवम्बर तक मनेगा नवजात शिशु देखभाल सप्ताह 

सीतापुर, 17 नवंबर। नवजात के भविष्य को खुशहाल बनाने और शिुशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जिले में 15 नवंबर से नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान का समापन आगामी 21 नवंबर को होगा। इस सप्ताह के तहत उन सभी बिन्दुओं पर हर वर्ग को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा, जिसके जरिए शिशुओं को ‘आयुष्मान’ बनाया जा सके। इस बार इस सप्ताह की थीम ‘अनमोल जीवन की शुरुआत, नवजात शिशु की देखभाल’ के साथ रखी गई है। इस बारे में जानकारी देते हुए सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि इस सप्ताह के तहत आमजन विशेष रूप से गर्भवती और धात्री को नवजात शिशु की देखभाल के बारे में जागरूक करने का काम शुरू कर दिया गया है। 

सीएमओ ने बताया कि शासन के निर्देश पर नवजात शिशु देखभाल सप्ताह की प्रमुख गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा देने के साथ ही बीमार नवजात शिशुओं की पहचान के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा सरकार द्वारा चलाये जा रहे बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में भी सभी को अवगत कराया जा रहा है। इस दिशा में स्वैच्छिक संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है, जिससे कि शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सकी। 

जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जीतेंद्र कुमार ने बताया कि नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल के लिए जरूरी है कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं। प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। नवजात को तुरंत न नहलायें केवल शरीर पोंछकर नर्म साफ़ कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाना शुरू कर दें और छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराएं। जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और विटामिन के का इंजेक्शन लगवाएं। नियमित और सम्पूर्ण टीकाकरण कराएं। उन्होंने बताया कि नवजात की नाभि सूखी एवं साफ रखें। संक्रमण से बचाएं और मां व शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें। कम वजन और समय से पहले जन्में बच्चों पर विशेष ध्यान दें और शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) की विधि अपनाएं। शिशु जितनी बार चाहे दिन या रात में बार-बार स्तनपान कराएं। कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाएं, शहद, घुट्टी, पानी आदि बिल्कुल न पिलाएं।

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