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इटावा,तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ और लगातार खांसी होने पर निमोनिया से संबंधित जांचें जरूरी है - डॉ अजय शर्मा.

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विश्व निमोनिया दिवस


इटावा,तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ और लगातार खांसी होने पर निमोनिया से संबंधित जांचें जरूरी है - डॉ अजय शर्मा


 कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण बच्चे निमोनिया से ग्रसित होते हैं- डॉ शादाब आलम

इटावा 12 नवंबर 2021।

हर साल 12 नवंबर  को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है. ‘निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक संक्रमण है, जिसके कारण फेफड़ों में द्रव या मवाद भर जाता है। तेज बुखार सांस लेने में तकलीफ और लगातार खांसी आना प्रमुख लक्षण है निमोनिया के इसीलिए इन लक्षणों के होने पर सतर्कता बरतें और तुरंत जिला अस्पताल आकर जांच करवाएं यह कहना है फिजीशियन डॉ अजय शर्मा का। उन्होंने बताया इतना ही नहीं बुजुर्गों में निमोनिया का बढ़ा हुआ स्तर जानलेवा भी हो सकता है।वातावरण में बढ़ता प्रदूषण भी निमोनिया के रोगी को प्रभावित करता है,इसलिए मैं सभी से अपील करूंगा वर्तमान समय घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग अवश्य करें। निमोनिया से बचने के लिए आप कुछ घरेलू उपचार और हेल्दी डाइट का पालन कर सकते हैं। हेल्दी डाइट न सिर्फ आपको हेल्दी रखने बल्कि निमोनिया से भी बचाने  में मदद कर सकती है।  डॉ शर्मा ने बताया निमोनिया के खतरे को कम करने के लिए अपने आहार में हरी सब्जियां, फलों का रस,अंडा,लहसुन,हल्दी का प्रयोग अवश्य करें जिससे संक्रमण से बचा जा सकता है।

बच्चों को हो निमोनिया तो ना बरतें लापरवाही


जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ शादाब आलम ने बताया मौसम में बदलाव के कारण बच्चे निमोनिया से ग्रस्त होते हैं इसलिए विशेष सावधानी बरतें।उन्होंने बताया 6 माह के बच्चे को स्तनपान कराएं और इससे बड़े बच्चों को स्तनपान के साथ  को पोष्टिक आहार खिलाएं और विटामिन ए की खुराक समय-समय पर पिलाएं। डॉ आलम ने बताया कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली  के कारण बच्चा निमोनिया से ग्रस्त होता है। दूसरा कारण वायु प्रदूषण भी है जिससे प्रदूषित वायु सांस के सहारे फेफड़ों तक पहुंच जाती है और संक्रमण का कारण बनती है।


निमोनिया के कारण बच्चों में निम्न लक्षण पाए जाते हैं।

बुखार के साथ  खांसी सांस लेने में कठिनाई।

तेज सांस लेना या तेज पसली का चलना।

 बलगम वाली खांसी कपकपी के साथ बुखार खांसी के साथ खून आना

 गंभीर रूप से ग्रस्त निमोनिया के बच्चे खाने पीने में असमर्थ हो जाते हैं। और हाइपोथर्मिया और अकड़न महसूस करते हैं।


निमोनिया से बचाव के उपचार व जांच


डॉ आलम ने बताया निमोनिया का पता लगने पर छाती का एक्स-रे करवाएं, सफेद रक्त कोशिकाओं की जांच, सीटी स्कैन , बलगम की जांच एगर ब्लड गैस टेस्ट और फेफड़ों के आसपास जमा तरल पदार्थ की जांच कराना आवश्यक होता है।

डॉ आलम ने बताया निमोनिया से बचाव के लिए सर्दी के मौसम में बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं व यदि निमोनिया के लक्षण बच्चे में लग रहे हैं तो उसका इलाज डॉक्टर से करवाएं मेडिकल स्टोर या अन्य दवाएं ना दें क्योंकि निमोनिया में मेनिनजाइटिस और सेप्टीसीमिया बहुत जल्द ही बढ़ जाता है उपचार में देरी होने पर बच्चे की हालत अस्थिर हो सकती है। इसीलिए निमोनिया होने पर सही समय पर किया गया उपचार अधिक प्रभावशाली होता है और बच्चा जल्दी स्वस्थ भी हो जाता है।

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