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गोरखपुर ,क्षय रोग उन्मूलन में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका.

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गोरखपुर ,क्षय रोग उन्मूलन में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका


संवेदीकृत किये गये शहर के निजी चिकित्सक


जिला क्षय रोग केंद्र के तत्वावधान में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन


गोरखपुर, 11 सितम्बर 2021


जिला क्षय रोग केंद्र के तत्वावधान में शहर के एक निजी होटल में 60 से अधिक निजी चिकित्सकों को शुक्रवार की रात क्षय उन्मूलन के प्रति संवेदीकृत किया गया । सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तहत यह संवेदीकरण स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च एंड इनोवेशन और लेप्रा सोसायटी जीत प्रोजेक्ट के तहत किया गया  । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुधाकर पांडेय की अध्यक्षता में चिकित्सकों को बताया गया कि  क्षय उन्मूलन में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका है ।


कार्यक्रम में बताया गया कि निजी क्षेत्र के सहयोग से जिले में 3301 टीबी रोगी जनवरी से अब तक चिन्हित किये गये हैं ,  जो निजी चिकित्सक नये टीबी रोगी को नोटिफाइड करवाते हैं उन्हें 500 रुपये उनके खाते में दिये जाते हैं । नोटिफाइड मरीज का ब्यौरा निःक्षय पोर्टल पर दर्ज हो जाता है और मरीज के खाते में भी इलाज के दौरन पोषण के लिए 500 रुपये प्रति माह दिये जाते हैं । चिकित्सकों को क्षय उन्मूलन संबंधित सभी नये दिशा-निर्देशों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गयी । कार्यक्रम को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनॉकलॉजिस्ट की अध्यक्ष डॉ. अमृता जयपुरियार, विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. सौरभ श्रीवास्तव और प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. नीरज किशोर पांडेय ने भी संबोधित किया ।


कार्यशाला में स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्व मिश्र ने टीबी उन्मूलन में निजी क्षेत्र की सहभागिता की प्रशंसा की और कहा कि अद्यतन दिशा-निर्देशों के अनुसार सहयोग अपेक्षित है । उन्होंने बताया कि लाइन ऑफ  ट्रीटमेंट और न्यू ड्रग्स के बारे में भी चर्चा हुई है । गर्भवती व धात्री में टीबी प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी । इस अवसर पर उप जिला क्षय रोग अधिकारी डा. विराट स्वरूप, डा. वीएन अग्रवाल, डा. अजय श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह, पीपीएम अभय नारायण मिश्र, आफताब अहमद, कमलेश गुप्ता, इंद्रनील, गोविंद और मयंक भी प्रमुख तौर पर मौजूद रहे ।


*ऐसे लक्षणों मिलें तो हो सकती है टीबी*


डॉ. मिश्र ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं । ऐसे में अगर खांसी का मरीज है तो उसके सभी लक्षणों की गहनता से पड़ताल होनी चाहिए और संभावित टीबी मरीज दिखे तो टीबी की जांच अवश्य करवाई जानी चाहिए ।

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