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कानपुर ,बुखार होने पर कोई भी दवा स्वयं से खाना है खतरनाक - डॉ. द्विवेदी .

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कानपुर ,बुखार होने पर कोई भी दवा स्वयं से खाना है खतरनाक - डॉ. द्विवेदी 

डेंगू में एंटीबायोटिक दवा खाने से होता है उल्टा असर 

प्लेटलेट्स तेज़ी से होती है कम, मरीज़ को बढ़ जाता है खतरा 

कानपुर, 07 सितम्बर । आमतौर पर बुखार आने पर लोग खुद से ही मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेते हैं और साधारण बुखार होने पर वो ठीक भी हो जाते हैं । लेकिन अगर बुखार डेंगू के कारण हो तो ऐसा करना मरीज़ की जान को खतरे में भी डाल सकता है, यह कहना है डॉ. सीमा द्विवेदी का । 

जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा द्विवेदी की मानें तो किसी भी बीमारी की दवा बिना चिकित्सक के परामर्श के नहीं लेनी चाहिए। डेंगू हो या कोई अन्य बीमारी अपने मन से दवाई लेना आपके लिए घातक हो सकता है।


डॉ. सीमा ने डेंगू पर बात करते हुए बताया कि वैसे तो बीमारी में एंटीबायोटिक दवाएँ दी जाती हैं लेकिन डेंगू का बुखार होने पर एंटीबायोटिक दवाएँ नहीं दी जाती हैं । जब व्यक्ति बुखार से पीड़ित होता है तो उसके शरीर में कमजोरी आती है और खून में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं । ऐसे में एंटीबायोटिक या दर्द की दवाओं से शरीर में प्लेटलेट्स और कम हो जाती हैं जो कि मरीज़ को और ज्यादा ख़राब स्थिति में पहुंचा देता है । इसलिए बुखार होने पर केवल पैरासिटामाल ही लें और अगर 2-3 दिन में बुखार नहीं जाता है तो चिकित्सक को दिखाएँ, जाँच कराएँ और जाँच के बाद चिकित्सक के अनुसार दवाओं का सेवन करें ।

डॉ. सीमा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों का खास खयाल रखने की जरूरत होती है क्योंकि इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है । यदि गर्भवती या बच्चों को डेंगू या अन्य संक्रामक रोग होते हैं तो उनको एक स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा बहुत ही ज्यादा खतरा होता है ।

डेंगू के लक्षण –

ठण्ड लगने के साथ अचानक तेज बुखार आना, मांसपेशियों और जोड़ो में दर्द होना, आंख के पिछले भाग में दर्द होना, बहुत कमजोरी लगना, भूख कम लगना, गले में दर्द होना, शरीर पर लाल चकत्ते आना आदि I

जिला मलेरिया अधिकारी ए.के.सिंह ने बताया कि डेंगू की जांच के लिए एलाइजा विधि से जाँच में डेंगू की पुष्टि होने पर ही मरीज़ को डेंगू से पीड़ित माना जा सकता है । सभी निजी चिकित्सालय, नर्सिंग होम व पैथोलॉजी सेंटरों को निर्देश के साथ पत्र जारी किया गया है । पत्र में डेंगू, मलेरिया या किसी भी वेक्टर जनित रोगों की जाँच, उपचार में सावधानी बरतने और मरीज़ में रोग की पुष्टि होने पर उसकी सूचना सी.एम.ओ. कार्यालय को उपलब्ध करने और जाँच सैंपल को मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजने के निर्देश दिए गये हैं ।

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