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सीतापुर ,परिवार नियोजन के लिए पुरुषों का आगे आना सुखद: सीएमओ.

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सीतापुर ,परिवार नियोजन के लिए पुरुषों का आगे आना सुखद: सीएमओ 

-  इस बार जनसँख्या स्थिरता पखवारे के दौरान चार  पुरुषों ने कराई नसबंदी 

- वितरित किए जाने वाले कंडोम की संख्या में भी हुई वृद्वि 

सीतापुर, 27 अगस्त। परिवार नियोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया  जा रहा  प्रयास अब रंग लाने लगा है। लोग परिवार नियोजन को लेकर जागरूक हो रहे हैं। छोटा परिवार-सुखी परिवार की अवधारणा को अपने जीवन में साकार करने के लिए अब महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी आगे आ रहे हैं। लोगों में परिवार नियोजन के अस्थायी और स्थायी साधनों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। दंपति परिवार नियोजन और दो बच्चों के बीच के अंतराल को लेकर अधिक सजग हुए हैं। इसका पुख्ता प्रमाण है इस साल का जनसंख्या स्थिरता पखवारा। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधु गैरोला का कहना है कि परिवार नियोजन के लिए पुरुषों का आगे आना सुखद है। वह कहती हैं कि स्वास्थ्य विभाग की कुशल रणनीति, मजबूत इच्छाशक्ति और अटल इरादों के चलते लोगों में परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता बढ़ी है, इसी के साथ विभान ने लोगों तक परिवार नियोजन के साधनों की पहुंच को भी आसान बनाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर बीती 11 से 31 जुलाई के मध्य जनसंख्या स्थिरता पखवारा मनाया गया। पिछले वर्ष के जनसंख्या स्थिरता पखवारा और इस साल के जनसंख्या स्थिरता पखवारा के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो स्पष्ट है कि नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधनों को अपनाने के लिए लोग आगे आए हैं। 

इनसेट ---

यह हैं जनसंख्या स्थिरता पखवारे के आंकड़े ---

परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अफसर और एसीएमओ डॉ. एसके शाही ने बताया कि वर्ष 2020 में इस पखवारे के दौरान एक भी पुरुष नसबंदी (एनएसवी) नहीं हो सकी थी, जबकि इस बार जिले में चार पुरुषों ने स्वेच्छा से नसबंदी कराई है। महिला नसबंदी के मामले में भी इस साल प्रगति हुई है। बीते साल हुईं महज दो महिला नसबंदी के मुकाबले इस साल 77 महिलाओं ने परिवार नियोजन के इस स्थायी साधन को अपनाया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल जिले भर में कुल 931 परिवारों ने आईयूसीडी को अपनाया था, इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 990 हो गया है। इसी तरह बीते साल पीपीआईयूसीडी का लाभ लेने वाले 846 दंपति के मुकाबले इस साल इस 1255 दंपति ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। इस साल 852 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन लगवाया, जबकि गत वर्ष इस पखवारे के दौरान महज 259 महिलाओं ने यह इंजेक्शन लगवाया था। गत वर्ष 53,953 कंडोम का वितरण हुआ था, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 89,481 पर पहुंच गया है। इसी तरह गत वर्ष 7,795 स्ट्रिप्स गर्भनिरोधक गोलियों छाया और माला एन का वितरण हुआ था, जबकि इस साल 19,441 स्ट्रिप्स का वितरण किया गया है। पिछले साल 3831 ईसीपी पिल्स का वितरण हुआ था, जबकि इस साल 5046 पिल्स का वितरण हुआ है।

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