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सीतापुर ,भंडिया और बमेहरा पीएचसी को मिला कायाकल्प अवार्ड .

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सीतापुर ,भंडिया और बमेहरा पीएचसी को मिला कायाकल्प अवार्ड 

-      भंडिया को दो लाख और बमेहरा पीएचसी को 50 हजार रूपये का पुरस्कार 

- भंडिया को 75.7 और बमेहरा को 71.8 अंक प्राप्त हुए

सीतापुर, 25 अगस्त। कायाकल्प अवार्ड में एक बार फिर कसमंडा सीएचसी ने अपना दबदबा कायम किया है। बीते चार सालों से यह सीएचसी कायाकल्प अवार्ड के लिए चुनी जाती रही है। इस साल भी यह सम्मान इस सीएचसी के खाते में दर्ज हुआ है। इसके अलावा पीएचसी अवार्ड के रूप में जिले की जिन दो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों  (पीएचसी) का चयन किया गया है, वह दोनों इसी सीएचसी के अंतर्गत आते हैं । इस साल यह पुरस्कार भंडिया और बमेहरा पीएचसी को मिला है। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. मधु गैरोला ने बताया कि कसमंडा सीएचसी के अंतर्गत आने वाली जिले की भंडिया पीएचसी को क्वालिटी एश्योरेन्स के तहत जिले में प्रथम पुरस्कार मिला है।  इसके तहत इस पीएचसी को कायाकल्प अवार्ड के रूप में दो लाख रूपये प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा बमेहरा पीएचसी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया है। इसके तहत इस पीएचसी को 50 हजार रूपये प्रदान किए जाएंगे। सीएमओ ने बताया कि प्रदेश में कई सालों से क्वालिटी एश्योरेन्स के अंतर्गत सीएचसी और पीएचसी को कायाकल्प पुरस्कार दिया जा रहा है। इस पुरस्कार के लिए इन पीएचसी के  चिकित्सा अधीक्षक समेत सभी स्वास्थ्य कर्मी बधाई के पात्र हैं। अन्य पीएचसी के लोगों को इनसे प्रेरणा लेकर भविष्य में इस तरह के पुरस्कार प्राप्त करने  के लिए प्रयास करने चाहिए। ज़िला परामर्शदाता क्वालिटी अशुरेंसइस डॉ. इरफान अहमद अब्बासी  ने बताया कि भंडिया को 75.7 और बमेहरा को 71.8 अंक हासिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि  इससे पहले कसमंडा, मिश्रिख और सिधौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को भी इसी साल का कायाकल्प अवार्ड मिल मिल चुका है।

कसमंडा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अरविंद बाजपेयी ने बताया कि कायाकल्प पुरस्कारों की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 मई 2015 को की थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने इस साल 295 पीएचसी की सूची जारी की है। इस सूची में कसमंडा सीएचसी के अंतर्गत आने वाली इन दोनों पीएचसी के नाम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस श्रेणी में पुरस्कार पाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सात बिंदुओं रोगी संतुष्टि में वृद्धि करना, चिकित्सालय कर्मियों के कार्यशैली एवं दक्षता में सुधार करना, सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, हाइजिन प्रमोशन, सेनिटाइजेशन, संक्रमण प्रबंधन आदि पर जांच टीम के द्वारा अंक दिए जाते हैं। इन्हीं अंकों के आधार पर पीएचसी की रैकिंग तैयार होती है।

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