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कमलापुर ,नशा करने वाले का घर खुशहाल नहीं रहता-डाॅ जगदीश प्रसाद .

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कमलापुर ,नशा करने वाले का घर खुशहाल नहीं रहता-डाॅ जगदीश प्रसाद 


कमलापुर-सीतापुर । महाराजा छीता पासी सेवा संस्थान  उत्तर प्रदेश के तत्वधान में नशा मुक्ति के उपलब्ध में एक बैठक का आयोजन किया गया बैठक के मुख्य अतिथि डॉ.जगदीश प्रसाद पासवान डब्ल्यू एच ओ भारत सरकार का स्वागत किया गया बैठक में उपस्थित जगमोहन रावत ,कमलेश रावत ,सुरेन्द्र भार्गव ,अंबारलाल ,श्रीपाल , विजय , मोहित ,रामनाथ आदि  लोग मौजूद रहे । इस अवसर डाक्टर जगदीश प्रसाद ने उपस्थित लोगों को बताया कि अनुभूतियों और संवेदनाओं का केन्द्र मनुष्य का मस्तिष्क है। सुख-दुःख का , कष्ट-आनंद का , सुविधा और अभावों का अनुभव मस्तिष्क को ही होता है तथा मस्तिष्क ही प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदलने के जोड़-तोड़ बिठाता हैं। कई व्यक्ति इन समस्याओं से घबरा कर अपना जीवन ही नष्ट कर डालते है परन्तु अधिकांश व्यक्ति जीवन से पलायन करने के लिए कुछ ऐसे उपाय अपनाता है, जैसे शतुरमुर्ग आसन्न संकट को देखकर अपना सिर रेत में छुपा लेता है। इस तरह की पलायनवादी प्रवृतियों में मुख्य है मादक द्रव्यों की शरण में जाना । शराब ,गांजा ,भांग , चरस ,अफीम ,ताडी़ आदि नशे वास्तविक जीवन से पलायन करने की इसी मनोवृत्ति के परिचायक है। लोग इनकी शरण में या तो जीवन की समस्याओं से घबरा कर जाते है अथवा अपने संगी-साथियों को देखकर इन्हें अपना कर पहले से ही अपना मनोबल चौपट कर लेते है। मादक द्रव्यों के प्रभाव से वह अपनी अनुभूतियों, संवेदनाओं तथा भावनाओं के साथ-साथ सामान्य समझ-बूझ और सोचने-विचारने की क्षमता भी खो देता है। मादक द्रव्य इतने उत्तेजक होते हैं कि सेवन करने वाले को तत्काल ही अपने आसपास की दुनिया से काट देते है और उसे विक्षिप्त कर देते है।

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